“धर्म” से “कर्म”
इसलिए महत्वपूर्ण है, क्यों की
“धर्म” करके भगवान से
मांगना पडता है,
जबकि “कर्म” करने से
भगवान को खुद ही
देना पडता है
आप चाहे कितने भी
अच्छे काम करेँ..
या कितने भी
अच्छे इंसान हो..।
किन्तु दुर्जन और दुष्ट व्यक्ति
सदैव आपके दोष
खोजने मेँ व्यस्त रहते हैँ…!
एक तुम को हमें याद
करने की फुर्सत नहीं
एक हम को तुम्हे
भूलने की आदत नहीं
तुम्हे भुलाया भी जाए तो
कैसे सांसो के बिना
जीने की आदत जो नहीं
दिल ने कहा आँख से
देखा करो कम क्योंकि
देखते हो तुम, तड़पते हैं हम
आँख ने कहा दिल से
सोचा करो कम क्योंकि
सोचते हो तुम, रोते हैं हम
उनकी तस्वीर को
सीने से लगा लेते हैं,
इस तरह जुदाई का
ग़म मिटा लेते हैं,
किसी तरह कभी
ज़िक्र हो जाए उनका तो,
हस कर भीगी पलके
छुपा लेते हैं.
कुदरत के करिश्मों में
अगर रात ना होती,
ख़्वाबों में भी उनसे
मुलाक़ात ना होती,
यह दिल हर ग़म की वजह है..
यह दिल ही न होता तो
कोई बात न होती.
आप खफा हो गए तो
कोई ख़ुशी न रहेगी,
आप के बिना चिरागों में
रोशनी न रहेगी,
क्या कहे
क्या गुजरेगी दिल पर,
जिंदा तो रहेंगे पर
ज़िन्दगी न रहेगी.
ना कोई किसी से
दूर होता है न कोई
किसी के पास होता है
रिश्ते खुद चलके आते हैं
जब कोई किसी के
नसीब में होता है ...











